फेसबुक जी एल गौर उवाच-हुर्रियत को हुर हुर

IMG_20180528_234134आज कश्मीर घाटी में हुर्रियत द्वारा दो दिन का बंद आहूत किया गया है। किसी आतंकवादी या आतंकवादी संगठन के समर्थन में बंद का आह्वान एक देशद्रोही कृत्य है। दुर्दांत आतंकवादियों को अपना हीरो बतलाना,उनके समर्थन में नारे लगाना यदि देशद्रोह की श्रेणी में नहीं आता तो फिर इस क़ानून को खत्म ही कर देना चाहिए। ताकि देश की कानून संहिता का सरे आम मजाक तो न उड़े। कश्मीर में पाकिस्तान और आईएसआई के झंडे लहराना,पाकिस्तान और आईएसआई के नारे लगाना अब कोई दुर्लभ घटना नहीं रह गई है।
हुर्रियत को पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देशों से फंडिंग मिलती है। भारत की एजेंसियाँ इसकी जांच कर रही हैं। समय आ गया है सरकार को अब हुर्रियत को बैन कर देना चाहिए। कश्मीर में हुर्रियत का कोई जनाधार नहीं है। भारत सरकार के सिवा उन्हें कोई गम्भीरता से नहीं लेता। कश्मीर में यह हुर्रियत तो वैसे ही है जैसे किसी शादी में दुल्हन के लिए कई पक्ष झगड़ रहे हों। मौके का फायदा उठा कर टेंट वाला भी कुर्सी डाल कर बैठ जाए कि हम भी खाली हाथ नहीं लौटेंगे। दुल्हन को लेकर ही जायेंगे।
सरकार यदि कश्मीर पर काफी गम्भीर है और वह इस समस्या का स्थायी और प्रभावी समाधान चाहती है तो उसे अविलम्ब हुर्रियत को हुर-हुर कर देना चाहिए। सरकार हुर्रियत पर प्रतिबन्ध लगाती है तो जान लेना उसने पहला कदम उठा लिया है।
हुर्रियत को यदि आप बैन नहीं कर रहे तो कम से कम इनकी सुरक्षा व्यवस्था तो हटा लीजिये। हुर्रियत के इन बूढ़े और तिथिबाह्य नेताओं को इतनी हाई सेक्युरिटी क्यों दी जा रही है?आप अविलम्ब इनकी यह सुरक्षा व्यवस्था हटा लीजिये। देखना या तो यह चोर इंग्लैंड या सऊदी अरब भाग जायेंगे या फिर आतंकवादी उन्हें 72 कुँवारी और हसींन हूरों के पास भेज देंगे। कम से कम इनका मामला तो निपट जाएगा।
सरकार से निवेदन है कि वह एक कदम तो ढंग से उठाये। कश्मीर पर मोदी सरकार किस बात का इन्तजार कर रही है यह समझ से बाहर जान पड़ता है।
जय हिंद!

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